पूरी दुनिया में नोवल कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण बहुत से लोग अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं।

इस पोस्ट में हम N95 और FFP2 / FFP3 जैसे रेस्पिरेटर फ़िल्टरिंग स्टैंडर्ड्स के बीच अंतर देखेंगे …

Contents

मास्क बनाम रेस्पिरेटर

आगे पढ़ने से पहले यह जान लेते हैं कि आखिर “मास्क” और “रेस्पिरेटर” के बीच तकनीकी अंतर क्या होता है। रोज़मर्रा की भाषा में हम रेस्पिरेटर को भी मास्क ही कहते हैं लेकिन यह तकनीकी रूप से अलग होता है।

मास्क के उपयोग:

  • मास्क की फिटिंग ढीली होती है और ये मुँह और नाक को ढँकते हैं।
  • मास्क एक तरफ़ा सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं जिससे पहनने वाले के शारीरिक द्रव फैलने से रुक जाएँ।
  • इसे ऑपरेशन के दौरान मरीज पर खाँसी, छींक आदि के छींटे रोकने के लिए पहना जाता है।
  • जानकर अजीब लग सकता है लेकिन मास्क उन्हें पहनने वाले की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन नहीं किए जाते।
  • ज़्यादातर मास्कों की कोई सुरक्षा रेटिंग नहीं होती (उदाहरण के लिए NIOSH या EN)

रेस्पिरेटर के रूप में उपयोग:

  • रेस्पिरेटर टाइट फिटिंग वाले मास्क होते हैं जिन्हें चेहरे पर एक सील बनाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है
  • बिना-वाल्व वाले रेस्पिरेटर बाहर से अंदर आने वाली और अंदर से बाहर जाने वाली हवा दोनों को फ़िल्टर करके दोतरफा सुरक्षा देते हैं।
  • इन्हें पहनने वाले की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया जाता है (ठीक से पहनने पर) जिसे मास्क की सुरक्षा रेटिंग तक सुरक्षा मिलती है।
  • ये डिस्पोज़ेबल, हाफ़-फेस या फुल-फेस टाइप में मिलते हैं।

रेस्पिरेटर स्टैंडर्ड

ऐसा नहीं है कि सर्जिकल स्टाइल मास्क किसी काम के नहीं होते (नीचे अधिक चर्चा की गई है)। बस फर्क इतना है कि इन्हें पहनने वाले की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन नहीं किया जाता जबकि रेस्पिरेटर पहनने वाले को सुरक्षा देता है।

यूएस सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल (CDC) ने N95 रेस्पिरेटर स्टैंडर्ड को अपने Covid-19 अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके SARS निर्देश (SARS कोरोना जैसा ही एक वायरस है) में सुरक्षात्मक उपकरणों के एक हिस्से के रूप में माना है। यह दर्शाता है कि N95 या इससे ऊपर के रेस्पिरेटर स्वीकार्य होते हैं।

N95 बनाम FFP3 और FFP2

रेस्पिरेटर में सबसे ज़्यादा बात N95 टाइप की होती है। यह एक अमेरिकी स्टैंडर्ड है जिसे सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) का ही एक भाग NIOSH मैनेज करता है।

यूरोप दो अलग-अलग स्टैंडर्ड का उपयोग करता है। “फ़िल्टरिंग फेस पीस” स्कोर (FFP), जो EN स्टैंडर्ड 149: 2001 के अंतर्गत आता है। वहीं EN 143 स्टैंडर्ड P1 /P 2 / P3 रेटिंग कवर करता है। दोनों स्टैंडर्ड CEN (यूरोपियन कमेटी फॉर स्टैंडर्डाइज़ेशन) मैनेज करती है।

आइए इन अलग-अलग स्टैंडर्ड की तुलना करके देखते हैं:

रेस्पिरेटर स्टैंडर्डफ़िल्टर क्षमता (0.3 माईक्रॉन व्यास या इससे बड़े सभी कणों के x% रोक देता है)
FFP1 & P1कम से कम 80%
FFP2 & P2कम से कम 94%
N95कम से कम 95%
N99 & FFP3कम से कम 99%
P3कम से कम 99.95%
N100कम से कम 99.97%

आप देख सकते हैं कि N95 के निकटतम यूरोपीय रेस्पिरेटर FFP2 / P2 रेटेड रेस्पिरेटर होते हैं जो N95 की 95% की तुलना में 94% पर रेटेड हैं।

इसी तरह, N100 के सबसे निकट रेटेड रेस्पिरेटर हैं P3 – और इनके बस थोड़ा पीछे आते हैं FFP3.

आप मोटे तौर पर इस सारी जानकारी को ऐसे लिख सकते हैं:

KN95 बनाम N95

सैद्धांतिक रूप से China KN95 स्टैंडर्ड के स्पेसिफ़िकेशन N95 रेस्पिरेटर जैसे ही हैं – 3M दस्तावेज़ (link) देखें – जो बताता है कि “China KN95, AS/NZ P2, Korea 1st Class, and Japan DS FFRs रेस्पिरेटर NIOSH N95 और European FFP2 रेस्पिरेटर के बराबर माने जा सकते हैं। पर असलियत में यह इतनी सीधी चीज नहीं है क्योंकि यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि हर KN95 रेस्पिरेटर का स्टैंडर्ड US N95 या EU FFP2 जैसा होगा।

ध्‍यान रखें:

  • इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि हर KN95 रेस्पिरेटर * वास्तव में * चीनी KN95 स्टैंडर्ड पर खरा उतरेगा – धोखाधड़ी से सतर्क रहें।
  • जाँच कर लें कि यह चेहरे को चारों ओर से सील पैक कर देता है, इसमें गड़ने से बचने के लिए कुछ पैडिंग लगी हैं और इसमें चेहरे पर बाँधने के लिए पर्याप्त मजबूती और टेंशन वाली डोरियाँ हैं।

क्या N95 / N100 वास्तव में FFP2 / P3 से बेहतर हैं?

यह जरूरी नहीं है, यह ध्यान रखें कि ये स्टैंडर्ड केवल यह बताते हैं कि रेस्पिरेटर कणों के कम से कम कितने % को फ़िल्टर कर देगा। उदाहरण के लिए, यदि मास्क FFP2 रेटेड है तो यह 0.3 माइक्रॉन या उससे ज़्यादा व्यास के कम से कम 94% कणों को फ़िल्टर कर देगा । लेकिन व्यवहार में यह 94% और 99% के बीच फिल्टर करेगा। उत्पाद की जानकारी में निर्माता द्वारा इसका सटीक आंकड़ा अक्सर दर्शाया जाता है।

एक अच्छा उदाहरण है GVS एलिप्स रेस्पिरेटर, जिसे अमेरिका (link) में P100 (99.7%) पर और यूरोप (link) में P3 (99.95%) रेट किया गया है। व्यवहार में दोनों रीज़न में इनकी फ़िल्टरिंग क्षमता एक जैसी ही होने की संभावना है।

वाल्‍व वाले रेस्पिरेटर बनाम बिना वाल्‍व वाले रेस्पिरेटर

वाल्व वाले रेस्पिरेटर से साँस की हवा बाहर निकलनेे में आसानी होती है। इसलिए ये पहनने में आरामदायक होते हैं और रेस्पिरेटर के अंदर नमी जमा नहीं होती। ये मास्क कन्स्ट्रकशन की या घर पर खुद कुछ बनाने (DIY) के कामों के लिए उपयुक्‍त होते हैं।

वाल्व वाले रेस्पिरेटर के साथ समस्या यह है कि ये पहनने वाले की साँस छोड़ने की हवा को फ़िल्टर नहीं करते, इनमें केवल साँस अंदर लेने वाली हवा फ़िल्टर होती हैं। कोविड -19 जैसी स्थिति में यह एक तरफ़ा सुरक्षा दूसरों को जोखिम में डालती है। यही कारण है कि अस्पताल और क्लीनिकों में वाल्व वाले रेस्पिरेटर उपयोग नहीं किए जाते

यदि आपको दूसरों को भी बचाना हो (साथ ही उनकी इज्जत भी करना हो) और आपको एक वाल्व वाला रेस्पिरेटर भी पहनना हो, तो इसकी एक अच्छी तरकीब है वाल्व वाले रेस्पिरेटर के ऊपर एक सर्जिकल मास्क या “मुँह ढंकने वाला कपड़ा” लगा लेना, जो बाहर निकलने वाली साँस को फ़िल्टर कर देता है (आंशिक रूप से)।

कोरोनावायरस कितना बड़ा है और क्या रेस्पिरेटर इसे फ़िल्टर कर सकते हैं?

हाँ, सैद्धान्तिक रूप से तो 0.3 माइक्रॉन कण आकार जितनी फिल्टरिंग क्षमता वाले रेस्पिरेटर (N95/FFP2 या इससे ऊपर के) भी कोरोनोवायरस (जो लगभग 0.1 माइक्रॉन का होता है) के साइज़ से छोटे कणों को भी फिल्टर कर सकते हैं। इससे हमें यह पता नहीं चल सकता कि रेस्पिरेटर का उपयोग करने पर कोरोनोवायरस से कितनी सुरक्षा मिलेगी – इसकी पुष्टि होने के लिए भविष्य के अध्ययनों की प्रतीक्षा करनी होगी।

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें…

हाल ही में प्रकाशित एक पेपर से पता चलता है कि कोरोनोवायरस आकार में 0.06 और 0.14 माइक्रॉन के बीच होता है। ध्यान दें कि यह पेपर कोरोनोवायरस कण को 2019-nCoV कहता है जो इसका पुराना नाम है। वर्तमान में इस वायरस को SARS-CoV-2 कहा जाता है और इससे होने वाली बीमारी को कोविड -19 कहा जाता है।

रेस्पिरेटर को 0.3 माइक्रॉन और उससे बड़े कणों को फ़िल्टर करने की उनकी क्षमता से मापा जाता है (यह ध्‍यान रहे कि कोरोनवायरस इससे छोटा है)।

0.3 माइक्रॉन पर ध्यान केंद्रित करने का कारण यह है कि यह “सबसे ज़्यादा भेदने वाला कण आकार” (“MPPS-most penetrating particle size” ) है। इस आकार से ऊपर के कण जिन तरीकों से घूमते हैं हम उस गति का अनुमान लगा सकते हैं और ये कण ऐसे फिल्टर में फंस जाएंगे जिनके छेद इनसे छोटे हैं। 0.3 माइक्रॉन से छोटे कण ब्राउनियन गति से घूमते हैं – जिससे उन्हें फ़िल्टर करना आसान हो जाता है। ब्राउनियन गति में कण का वजन इतना कम होता है कि वह हवा में बिना रुकावट नहीं घूम पाता। यह हवा (नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आदि) के अणुओं से टकराने लगता है और टेबल टेनिस की बॉल की तरह इधर-उधर उचकता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार “सामान्य” गति और ब्राउनियन गति के बीच का यही कण आकार किसी फ़िल्टर को पकड़ने में सबसे कठिन होता है।

इससे हम यह समझ सकते हैं कि 0.3 माइक्रॉन आकार की उच्च फिल्टर क्षमता इस आकार के नीचे के कणों पर भी असर दिखाएगी।

रेस्पिरेटर फिल्टर और ब्राउनियन गति के विषय पर अधिक चर्चा और विवरण के लिए smartfilters.com पर इस बढ़िया पोस्ट को देखें।

अब एक खास रिसर्च देखते हैं जिसमें 0.3 माइक्रॉन और नीचे (कोरोनावायरस इलाका) में फ़िल्टर क्षमता मापी गई …

  • 3M कंपनी के इस लेख में इस रिसर्च पर चर्चा की गई है जिसमें उन्होंने जिन 6 N95 रेस्पिरेटर पर परीक्षण किया था वे 0.1 माइक्रॉन से कम आकार के कण लगभग 94% या इससे ज़्यादा क्षमता से अच्छे से फ़िल्टर कर पाए। नीचे का ग्राफ़ इसी लेख से लिया गया है जिसमें यह दर्शाया गया है:

 

  • smartfilters.com के पास इस विषय पर एक और बढ़िया लेख है जिसमें रिसर्च का हवाला देते हुए दिखाया गया है कि परीक्षण किए गए रेस्पिरेटर 0.007 माइक्रॉन (कोविड -19 से बहुत छोटे) को फ़िल्टर कर सके। उदाहरण के लिए, 3M 8812 रेस्पिरेटर (FFP1 रेटेड) 0.007 माइक्रॉन या उससे बड़े 96.6% कण फ़िल्टर कर सका। FFP2 या FFP3 की फिल्‍टर क्षमता तो और भी अधिक होगी।

नीचे फोटो (बड़ा करने के लिए क्लिक करें) अन्य छोटे अणुओं जैसे लाल रक्त कोशिका, या बहुचर्चित पीएम 2.5 कण आकार की तुलना में कोरोनवायरस का आकार दिखाती है।

कोरेानावायरस की अन्‍य कणों से तुलना की फोटो – सौजन्य smartairfilters.com

N बनाम P रेस्पिरेटर? (तेल प्रतिरोध)

CDC बताता है कि अमेरिका में तेल प्रतिरोध सुरक्षा के लिए 3 तरह की रेटिंग हैं; N, R या P:

  • N = तेल प्रतिरोधी नहीं
  • R = कुछ हद तक तेल प्रतिरोधी
  • P = कड़ाई से तेल प्रतिरोधी

व्यवहार में इसका मतलब यह है कि यदि मास्क इंडस्ट्रियल एरिया में उपयोग किए जाते हैं जहाँ हवा में बहुत सारे तेल कण हो सकते हैं और यदि मास्‍क P रेटेड नहीं है, तो तेल समय के साथ फ़िल्टर की क्षमता को कम कर सकता है।

कोविड -19 के जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे अधिकांश लोगों के लिए, तेलों से सुरक्षा जरूरी नहीं है- यह मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल एरिया में उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है।

 

सर्जिकल बनाम गैर-सर्जिकल रेस्पिरेटर

"रेगुलर" रेस्पिरेटर के अलावा ऐसे रेस्पिरेटर भी आते हैं जिन्हें "सर्जिकल" या "सर्जिकली अप्रूव्ड" रेस्पिरेटर कहा जाता है। ये भी N95/FFP2 जैसी पहले बताई रेटिंगों वाले होते हैं लेकिन ये तरल पदार्थों से प्रतिरोध के लिए भी उपयोगी होते हैं। ASTM F1862 द्वारा नियंत्रित एक योग्यता - जिसमें ऐसे गंभीर मामले आते हैं जब खून की कोई नली फटने पर उच्च दबाव वाले खून की रेस्पिरेटर पर बौछार हो जाती है। इस टेस्ट को पास करने के लिए मास्क पर बौछार होने पर भी उसके अंदर कोई तरल पदार्थ लीक नहीं होना चाहिए।

आप देख सकते हैं कि सर्जरी के लिए इस प्रकार का मास्‍क क्यों जरूरी होता है पर यह साफ नहीं है कि इन स्थितियों के बाहर यह कितना अतिरिक्त फायदा देगा। रेगुलर N95 / FFP2 मास्क खाँसी और छींक जैसी चीजों को रोक देते हैं।

नीचे दी गई तालिका में एक रेगुलर N95 मास्क (8210) की दो सर्जिकल N95 मास्क (1860 और 1870+) से तुलना की गई है।

सर्जिकल बनाम गैर-सर्जिकल रेस्पिरेटर का उदाहरण

प्रमुख अंतरों के लिए यह तुलना तालिका देखें (स्रोत: 3M वेबसाइट):
N95 रेस्पिरेटर
3M मॉडल 8210
सर्जिकल N95 रेस्पिरेटर
3M मॉडल 1860
सर्जिकल N95 रेस्पिरेटर
3M मॉडल 1870+
पहनने वाले को हवा में टंगे कणों (जैसे धूल, धुंध, धुएं, रेशे, और बायोएरोसोल, ऐसे वायरस और बैक्टीरिया) के संपर्क में आने से बचाने के लिए बनाया गया है।
चेहरे पर टाइट फिट होने और पहनने वाले के चेहरे और रेस्पिरेटर के बीच एक सील बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया
NIOSH 42 CFR 84 N95 आवश्यकताओं को पूरा करता है जिनके अनुसार तेल रहित ठोस और तरल एरोसोल के खिलाफ न्यूनतम 95% फिल्‍टर दक्षता होनी चाहिए
अमेरिकी एफडीए द्वारा सर्जिकल मास्क के रूप में बिक्री के लिए मंजूर
तरल प्रतिरोधी - ASTM Test Method F1862 "सिंथेटिक ब्लड द्वारा संक्रमण के लिए मेडिकल फेस मास्क का प्रतिरोध" जो मास्क के सिंथेटिक रक्त के प्रतिरोध को निर्धारित करता है, जो उच्च दबावों के तहत इसे निर्देशित करता है [1] ✅ 120 mm Hg ✅ 160 mm Hg

3M वेबसाइट के अनुसार:

[1] "ASTM F1862 मेडिकल फेसमास्क के सिंथेटिक ब्लड अंदर आ जाने के विरुद्ध प्रतिरोध को टेस्‍ट करने की एक मानक परीक्षण विधि है। यह टेस्ट इसलिए जरूरी होता है क्योंकि कुछ चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान कभी-कभी खून की नली फट सकती है जिससे हाई प्रेशर वाली खून की धार की सुरक्षात्मक फेसमास्क पर बौछार हो सकती है। टेस्ट प्रक्रिया निर्दिष्ट करती है कि किसी मास्क या रेस्पिरेटर के मानव उपयोग की तरह जांच के लिए उसे ज़्यादा उमस वाले वातावरण में रखकर टेस्ट होल्डर पर रखा जाए। मास्क पर 30 सेमी (12 इंच) की दूरी से सिंथेटिक खून (2cc) की सीधी बौछार की जाती है।

सर्जिकल मास्क और रेस्पिरेटर को मानव रक्तचाप (80, 120 और 160 mmHg) की सीमा के अनुरूप तीन स्पीड पर पास / फेल के आधार पर टेस्ट किया जाता है। इसके बाद मास्क के अंदर का यह निरीक्षण किया जाता है कि क्या कोई सिंथेटिक रक्त फेसमास्क के अंदर पहुँच गया या नहीं। इस टेस्ट विधि के अनुसार तरल प्रतिरोध तब माना जाता है जब उपकरण हर लेवल पर पास हो जाता है। "

संक्षेप में, ये सभी 3 मास्क 2019-nCoV और SARS पर CDC के दिशा निर्देशों के अनुसार पर्याप्त हैं। जैसा ऊपर उल्लेख किया गया है, हाई स्पीड तरल स्प्रे - जो सर्जरी के दौरान संभव है (जैसे कि धमनी का फटना) से प्रतिरोध के लिए 1860 और 1870+, 8210 से बेहतर होते हैं पर दैनिक उपयोग में ऐसा कुछ फायदा नहीं है।

 

रेस्पिरेटर उपयोग करने के जोखिम

रेस्पिरेटर उपयोग करने के कई संभावित जोखिम हो सकते हैं जिनके बारे में पता होना अच्छा होता है ताकि उनसे बचा जा सके।

  1. गलत फिटिंग और सही ढंग से न पहनना – अगर रेस्पिरेटर आपके चहरे पर फिट नहीं आता तो वह आपकी रक्षा नहीं करेगा। अधिक जानकारी के लिए फिटिंग परीक्षण और फिटिंग जाँच पर OSHA दिशा निर्देश देखेंं।
  2. रेस्पिरेटर के सामने के हिस्सों को छूना (जो वायरस आदि पकड़ता है) और फिर ये वायरस दूसरी चीजों में ट्रान्सफर कर देना जो आगे चलकर आपके मुँह और नाक में वापस जा सकता है।
  3. अनावश्यक जोखिम उठाना क्योंकि आप निश्चिंत हैं कि आपने रेस्पिरेटर पहना हुआ है। इससे झूठा आत्‍म-विश्वास न बनाएँ। सबसे बड़ी सुरक्षा सामाजिक दूरी बनाए रखना ही होती है।

इन 3 बिंदुओं पर आगे की चर्चा के लिए नीचे + पर क्लिक करें और बॉक्स बड़ा करके देखें:

1. फिटिंग ठीक न होना और रेस्पिरेटर ठीक से नहीं पहनना

यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हम जो रेस्पिरेटर उपयोग कर रहे हैं वह हमारे चेहरे पर टाइट फिट हो जाए जिससे पूरी हवा फ़िल्टर हो सके और बाजू से हवा पास नहीं हो पाए। आदर्श स्थितियों में व्यक्ति कई तरह के रेस्पिरेटर आजमा कर वह चुन सकता है जो सबसे अच्छी तरह से फिट आए। इसके बाद आप रेस्पिरेटर को कसकर लगाने के बाद "फिट टेस्ट" करेंगे और यह जांचेंगे कि क्या आप पास में रखे किसी रसायन को सूंघ सकते हैं या उसका स्वाद ले सकते हैं। यदि आप ऐसा कर पाए तो सुरक्षा पर्याप्त नहीं होगी। यदि आप ऐसा नहीं कर पाए तो आप फिट टेस्ट पास कर लेंगे। इस प्रक्रिया के बारे में और जानकारी एवं फिट टेस्ट के लिए अनुमोदित रसायनों की सूची OSHA वेबसाइट पर विवरण सहित देखें। हालाँकि अभी महामारी की स्थिति है और रेस्पिरेटर और टेस्ट में उपयोग होने वाले रसायनों, दोनों की कमी है। इसलिए हमें जो है उसी से जितना हो सके काम चलाना होगा। हाँ, सही तरीके से फिट होने वाले रेस्पिरेटर पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

2. रेस्पिरेटर के सामने के हिस्से को छूना

रेस्पिरेटर के सामने का हिस्सा एक जाल की तरह होता है जो सांस लेने पर वायरस और बैक्टीरिया को पकड़ कर उसे फ़िल्टर कर देता है। समस्या तब होती है जब हम मास्‍क के सामने के हिस्से को छूकर अपने चेहरे को छू लेते हैं। संक्षेप में कहें तो हमें मास्क के सामने वाले हिस्से काे बेहद खतरनाक पदार्थ मानना चाहिए और इसे छूने के बाद हमेशा हाथों को धोना चाहिए। इसके साथ ही मास्क के बाहर छूने और फिर मास्क के अंदर छूने से भी परहेज करें क्योंकि अंदर का हिस्सा आपके चेहरे से कसकर संपर्क में रहता है और इसे साफ करना मुश्किल होता है।

3. अनावश्यक जोखिम लेना

इसलिए कि आप एक रेस्पिरेटर पहने हैं, इसे अनावश्यक जोखिम उठाने के लिए झूठे आत्म-विश्वास का कारण न बनने दे। रेस्पिरेटर की कार्य क्षमता 100% से कम है। इसके कारण हैं इनकी फ़िल्टरिंग क्षमता सीमा (<100%) और ऊपर बताए 2 बिंदु। उदाहरण के लिए, ऐसे किसी कार्यक्रम में न जाएँ जहाँ बहुत सारे लोग हों (खासकर यदि यह किसी बिल्डिंग के अंदर हो रहा हो) और यह न सोचें कि बस आपने रेस्पिरेटर पहना हुआ है तो यह सुरक्षित है।

 

सर्जिकल मास्‍क

सर्जिकल मास्क आम तौर पर 3-प्लाई (तीन परत) डिज़ाइन वाले हेाते हैं, जिसमें “बगैर-बुने हुए” कपड़े की 2 परतों के बीच एक “Melt-blown” कपड़े की परत होती है। यह “Melt-blown” परत ही फ़िल्टरिंग क्षमता देती है। रेस्पिरेटर में भी “Melt-blown” का उपयोग किया जाता है इसलिए इसकी माँग बहुत बढ़ गई है, यह बहुत महँगा हो गया है और इसे मिलने में परेशानी हो रही है।

Melt-blown रेशों की माईक्रोस्‍कोप से ली गई फोटो – सौजन्य mdpi.com

Melt-blown कपड़ा बनाने के लिए प्लास्टिक को पिघलाकर उसे घूम रहे एक सिलिंडर पर हवा से फेंका जाता है। इसे ठीक से करने पर महीन रेशों वाला कपड़ा बन जाता है। अधिक तकनीकी जानकारी के लिए यहॉं देखें।

“Melt-blown” बनाने की मशीन की फोटो (बाएँ) सौजन्य एर्डेम रमज़ान की पुस्‍तक से। Melt-blowing प्रकिया (दाएँ) – सौजन्य 4FFF wikipedia

सभी “Melt-blown” कपड़ों में एक जैसी फ़िल्टरिंग क्षमता नहीं होती। कुछ कपड़े दूसरों की तुलना में बेहतर होते हैं। बगैर स्पेशलाइज्ड ज्ञान और उपकरणों के “Melt-blown” परत की फ़िल्टरिंग क्षमता का परीक्षण तो नहीं किया जा सकता पर हम कम से कम यह जरूर जाँच कर सकते हैं कि मास्क में “Melt-blown” परत मौजूद है या नहीं।

नीचे मैं एक सर्जिकल मास्क (बाएँ) का एक उदाहरण दिखा रहा हूं जो “Melt-blown” परत के बिना आया था। अतिरिक्त लागत और “Melt-blown” कपड़ों की वर्तमान में कमी की कारण निर्माता खर्च बचाने के लिए इसे हटा सकते हैं, इसलिए इस पर नज़र रखना आवश्‍यक है।

स्टैंडर्डाइज़्ड परीक्षण विधियों (ASTM F2100, EN 14683, या समकक्ष) के अनुसार परीक्षण किए सर्जिकल मास्क चुनने से आप खराब क्वालिटी के मास्क लेने से बच सकते हैं। सर्जिकल मास्क (विशेष रूप से 2 और 3) के लिए बनाए गए ASTM स्टैंडर्ड मुख्य रूप से सर्जरी के दौरान गीली चीजों से प्रतिरोध के लिए होते हैं। गैर-सर्जिकल परिस्थितियों में ये हाई लेवल के मास्क कोविड -19 से सामान्य मास्क की तुलना में ज़्यादा सुरक्षा नहीं देते।

यदि आप BFE95 / BFE99 का संदर्भ देखेंगे तो इनका अर्थ होता है - BFE = "Bacterial Filtration Efficiency" या "बैक्टीरिया को फ़िल्टर करने की दक्षता" और score = % of particles blocked, with a mean particle size of 3 microns (+/- 0.3microns) या "3 माइक्रॉन (+/- 0.3 माइक्रॉन) के औसत आकार रोके गए कणों का प्रतिशत" - स्रोत.

इसी तरह, PFE = Particle Filtration Efficacy या "कण फ़िल्टर करने की दक्षता". ASTM F2100 0.1माइक्रॉन तक PFE मापता है (स्रोत).

नेल्सन लैब्स की यह तालिका सर्जिकल मास्क के स्पेसिफिकेशन के और उदाहरण देती है, जिनमें BFE / PFE भी शामिल है।

क्या सर्जिकल मास्क कोरोनावायरस को फ़िल्टर कर सकते हैं?

चेहरे की सुरक्षा के लिए FFP2 / FFP3 या N95 / N100 ही उच्चतम स्टैंडर्ड हैं पर क्या सर्जिकल मास्क कोई सुरक्षा देते हैं?

सही कहा जाए तो सर्जिकल मास्क मुख्य रूप से मरीजों को चिकित्साकर्मियों से बचाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये पहनने वाले (जैसे सर्जन) के खाँसने / छींकने / बोलने पर उनके कीटाणुओं को फैलने से रोकते हैं। इसलिए ये मरीजों की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किए गए थे, न कि पहनने वाले की सुरक्षा के लिए।

रेस्पिरेटर की तुलना में सर्जिकल मास्क की एक बड़ी खामी है इनका चेहरे पर टाइट फिट न होना जिससे किनारों के चारों ओर जगह छूट जाती है।

वर्तमान में सर्जिकल मास्क (यहाँ तक कि रेस्पिरेटर की भी) पहनने वाले की कोरोनवायरस से रक्षा की प्रभावशीलता पर कोई रिसर्च उपलब्ध नहीं है। इसमे कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि यह वायरस बिल्कुल नया है।

इसकी जगह नीचे की रिसर्च इन्फ्लूएंजा के संदर्भ में सर्जिकल मास्क और N95 मास्क के उपयोग के बारे में बताती है। कोरोनावायरस से तुलना करने के लिए इन्फ्लुएंजा एक अच्छा वायरस कण हो सकता है क्योंकि ये दोनों ही महीन बूँदों और एरोसोल के जरिए फैलते हैं, दोनों श्वसन संक्रमण का कारण बनते हैं और दोनों कण आकार में समान हैं।

नोट – इन्फ्लूएंजा कण से की गई इस तुलना से यह न मान लें कि ये दोनों एक जैसी बीमारियाँ उत्पन्न करते हैं। वर्तमान आंकड़ें सुझाते हैं कि कोरोनावायरस की मृत्यु दर अधिक हो सकती है।

कोरोनावायरस (SARS-CoV-2) के आकार की फोटाेे इस रिसर्च पेपर से, इंफ्लुएंजा केे आकार की फोटो इस रिसर्च पेपर (Vaccine जर्नल में छपा) और Frontiers in Microbiology रिसर्च पेपर से ली गई है।

पहली स्टडी में अमेरिका के 2,862 स्वास्थ्य कर्मियों को 2 समूहों में विभाजित किया गया था, एक ने N95 मास्क पहने थे और दूसरे ने सर्जिकल मास्क (1)। सर्जिकल मास्क पहनने वाले समूह में 193 की तुलना में रेस्पिरेटर पहनने वाले समूह में 207 लोगों को इन्फ्लूएंजा हो गया था। यह अंतर सांख्यिकीय रूप से बहुत बड़ा नहीं था।

अगली स्टडी में कनाडाई नर्सों को 2 समूहों में विभाजित किया गया था, एक समूह ने N95 मास्क पहना था और दूसरे समूह ने सर्जिकल मास्क (2)। सर्जिकल मास्क पहनने वालों के समूह में इन्फ्लूएंजा के 50 मामले आए थे जबकि N95 रेस्पिरेटर समूह में 48 थे। यह भी बहुत बड़ा अंतर नहीं था।

तो इससे क्या निष्कर्ष निकाला जाए? ये 2 स्टडी सुझाती हैं कि क्लोज कॉन्टैक्ट क्लिनिकल सेटिंग्स में इन्फ्लूएंजा बीमारी को रोकने में सर्जिकल मास्क लगभग N95 मास्क जैसा ही काम करते हैं। जो चीज हमें यह नहीं बताती वह यह है कि क्या ये मास्क चेहरे पर कुछ भी नहीं पहनने की तुलना से बेहतर हैं।

यह पता लगाने के लिए हमें एक ऐसी स्टडी की जरूरत है जिसमें एक ऐसा नियंत्रण समूह हो जो चेहरे की कोई सुरक्षा उपयोग नहीं करे। नैतिक कारणों से ऐसी स्टडी ज़्यादा नहीं की जातीं लेकिन एक ऐसी स्टडी की गई है।

इस ऑस्ट्रेलियाई स्टडी में ऐसे 143 घरों में 286 वयस्कों का अवलोकन किया गया जिनमें इन्फ्लूएंजा-जैसी बीमारी से ग्रस्त बच्चे थे(3) ।यह साफ कर दें कि इन्फ्लूएंजा-जैसी बीमारी पैथोलॉजी लैब में कन्फ़र्म इन्फ्लूएंजा के समान नहीं होती। इसका पता बुखार, सूखी खांसी और तबीयत खराब लगने जैसे लक्षणों से लगाया जाता है। इन लक्षणों का अर्थ इन्फ्लूएंजा हो सकता है लेकिन यह सामान्य सर्दी या अन्य वायरस के कारण भी हो सकते हैं। यह पाया गया कि जिन वयस्कों ने घर में मास्क पहना था उन्हें घर के बच्चों से श्वसन संक्रमण होने की संभावना मास्क न पहनने वालों की तुलना में 4 गुना कम थी। यहाँ इम्पीरियल कॉलेज लंदन द्वारा इस स्टडी का एक अच्छा विश्लेषण किया गया है।

फोटो सौजन्य smartairfilters.com

यहाँ यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि ऑस्ट्रेलियाई स्टडी बहुत छोटी थी और इसे किसी भी स्थिति में निर्णायक नहीं माना जा सकता। इसके बाद भी, हमारे पास जो है हमें उसी से काम चलाना होगा और इससे कम से कम कुछ डेटा पॉइंट मिलते हैं:

  • इन्फ्लूएंजा-जैसी बीमारियों से बचाव में कुछ भी नहीं पहनने की तुलना में सर्जिकल मास्क या N95 (FFP2) रेस्पिरेटर पहनना बेहतर था (अध्ययन में)।
  • हमें यह लग सकता है कि सर्जिकल मास्क रेस्पिरेटर की तुलना में कम असरदार होते हैं पर ऊपर बताई स्टडी सुझाती हैं कि इनके असर में अंतर बहुत ज़्यादा नहीं होता। उदाहरण के लिए, पहली दो स्टडी में इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए सर्जिकल मास्क और N95 रेस्पिरेटर में कोई खास अंतर नहीं पाया गया।
  • यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हमने SARS-CoV-2 (कोरोनावायरस) के लिए इन्फ्लूएंजा सुरक्षा का एक प्रॉक्सी के रूप में उपयोग किया है। यह इसलिए किया गया है क्योंकि SARS-CoV-2 नया है और इस पर कोई तुलनात्मक अध्ययन नहीं हैं। लेकिन इसमें अभी भी बहुत अनिश्चितता है क्योंकि SARS-CoV-2 संक्रमण के मामले में बहुत अलग तरीके से काम कर सकते हैं।

कृत्रिम परिस्थितियों वाली एक लैब सेटिंग में हम पाते हैं कि सर्जिकल मास्क 0.007 माइक्रॉन तक छोटे कणों को 80% तक रोकने करने में सक्षम रहे थे। हम इसकी तुलना इस स्टडी के 3M 8812 रेस्पिरेटर से कर सकते हैं जिसने 96% कण (FFP1 रेटेड) रोके थे। यह ऊपर हमारी चर्चा से मेल खाता है।

निष्कर्ष: हमें पता नहीं है कि

नोवेल कोरोनावायरस के खिलाफ सर्जिकल मास्क कितनी सुरक्षा देते हैं। पर ऊपर कम से कम यह सुझाव तो मिलता है कि एक सर्जिकल मास्क बिना मास्‍क की तुलना में अधिक सुरक्षा दे सकता है – और यह बात पता होना बहुत फायदेमंद है। सुरक्षा के लिए इन्हें आखिरी रास्ते के रूप में तभी पहनना चाहिए जब कुछ और साधन न हो। बचाव के लिए प्राथमिक साधन रेस्पिरेटर ही हैं।

इनसे ज़्यादा सुरक्षित तरीका है ऐसे लोगों से दूर रहना जो बीमार या संभावित रूप से बीमार हैं और सामाजिक संपर्क को कम कर देना। लोगों के बड़े समूहों (नीचे सामाजिक दूरी अनुभाग देखें) में तो यह बहुत ज़्यादा जरूरी होता है। फिर से बता दें कि सर्जिकल मास्क का उपयोग एक आखिरी रास्ता होता है इसे पहनकर अनावश्यक जोखिम नहीं लेना चाहिए।

यदि हम किसी ऐसे बीमार व्यक्ति के पास हैं जिसे कोरोनोवायरस है या उन्हें होने की संभावना है तो उन्हें मास्क या रेस्पिरेटर पहनना चाहिए जिससे उनसे बीमारी फैलने की क्षमता कम हो जाए।

DIY (डू इट योरसेल्फ़) / घर का बना मास्क

CDC ने हाल ही में अमेरिकी नागरिकों के लिए दिशा निर्देर्शों की घोषणा की है कि सार्वजनिक सेटिंग्स में, जहाँ सामाजिक दूरी के उपाय मुश्किल होते हैं, वहाँ “क्लॉथ फेस कवरिंग” का उपयोग किया जाना चाहिए। सर्जिकल मास्क और एन 95 रेस्पिरेटर स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आरक्षित होने चाहिए। यदि नागरिक रेस्पिरेटर या सर्जिकल मास्क नहीं खरीदते हैं तो उन्हें कपड़ों के मास्क Amazon (हाँ, ये रखते हैं) वगैरह से खरीदने होंगे या खुद के मास्क बनाने पड़ेंगे।

कपड़े पर आधारित मास्क खरीदने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए, या, उन्हें अपना खुद का मास्‍क बनाना चाहिए।

DIY मास्‍क प्रोजेक्‍ट – फोटो सौजन्य masks4all.co

अपना मास्‍क कैसे बनाया जाता है?

सबसे पहले, यह देखते हैं कि अलग-अलग घरेलू चीजों में किस तरह का फ़िल्टर प्रभाव और साँस लेने में आसानी होती है। इसके लिए हम कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक स्टडी (link) का उल्लेख कर सकते हैं जिसमें एक कामचलाऊ फेस मास्क बनाने के लिए “तकिए के खोल और 100% कॉटन टी-शर्ट” सबसे उपयुक्त घरेलू सामग्री पाए गए“।

फोटो सौजन्य SmartAirFilters

देखने वाली बात यह है कि वैक्यूम क्लीनर बैग और डिश टॉवल जैसी चीजों में फिल्‍टर करने की क्षमता अधिक थी पर स्टडी ने उन्हें क्यों नहीं चुना? इन चीजों की साँस लेने की क्षमता अच्छी नहीं थी। यदि

यदि आप मास्क से अच्छे से साँस नहीं ले सकते तो वह काम का नहीं हो सकता। अधिक विवरण के लिए स्टडी के इस लेख को देखें (और रेखांकन चित्र!)

नीचे खुद ही मास्क बनाने के कुछ तरीके बताए गए हैं और पहले सामान्य फिर एडवांस्ड तरीके हैं:

1) बिना कुछ काटे टी-शर्ट मास्क

कैंची नहीं चलाना? कोई दिक्कत नहीं है। इस तरीके में आप देख सकते हैं कि एक टी-शर्ट को काटे-छांटे बिना अपने चेहरे के चारों ओर कैसे लपेटा जा सकता है। ऊपर बताई स्टडी के आधार पर जहाँ भी संभव हो 100% कॉटन टी-शर्ट का उपयोग करें। इस तरीके के लिए पूर्ण मार्गदर्शिका यहाँ पाएं।

2) बिना किसी सिलाई के टी-शर्ट मास्क

इस तरीके में एक टी-शर्ट, कैंची, पेन और स्‍केल का उपयोग किया गया है। रूना रे के YouTube वीडियो पर पूर्ण निर्देश देखें।

3) सिलाई वाला मास्क

जिन लोगों के पास सिलाई मशीन है उनके लिए मास्क बनाने के 2 अच्छे ट्यूटोरियल हैं- पहला, एक सादा मास्क (YouTube link), दूसरा – डोरी, नाक की फिटिंग और फिल्टर पॉकेट वाला अच्छी डिज़ाइन वाला मास्क (YouTube link)।

यह बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए (उम्मीद तो यही है) कि इन मास्क का सुरक्षा स्तर सर्जिकल मास्क और रेस्पिरेटर से कम होता है।

यदि आपने घर पर अच्छे मास्क की और डिज़ाइनें देखी हों तो नीचे कमेंट्स में शेयर करें।

रेस्पिरेटर हमारी रक्षा किससे कर रहे हैं?

महीन बूँदें

रेस्पिरेटर पहनने की प्राथमिक वजह महीन बूँदों बूँदों से रक्षा करना होता है। उदाहरण के लिए, अगर हमारे पास कोई बीमार व्यक्ति खाँस दे या छींक दे तो रेस्पिरेटर शारीरिक तरल पदार्थों को हमारे चेहरे तक पहुँचने से रोकता है।

महीन बूँदें आमतौर पर इतनी बड़ी होती हैं कि गुरुत्वाकर्षण उन्हें हवा में बने रहने के बजाय चीजों पर गिरा देता है। इसलिए ये ज़्यादा दूर नहीं जा पातीं। हालांकि बात करते समय निकलने वाली अत्यंत ही महीन माइक्रो बूँदों पर भी रिसर्च हुई है। जापान के रिसर्चर्स द्वारा बनाए गए इस Vimeo वीडियो में हाई स्पीड कैमरों से माइक्रो बूँदों को रिकॉर्ड किया गया। हम यह तो जानते हैं कि बड़ी बूँदें फैलाव में भूमिका निभाती हैं लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि सूक्ष्म बूँदें क्या भूमिका निभाती हैं।

फोटो सौजन्य, मास्‍क के उपयोग की आवश्यकता पर सुई हुआंग की ब्लॉग पोस्ट

एरोसोल
एरोसोलाइज्ड वायरस कण कुछ समय के लिए हवा में रह सकता है। उदाहरण के लिए जब कोई छींकता है तो दो चीजें हो सकती है – पहला, महीन बूँदों का निकलना जो थोड़ी दूर तक जा सकती हैं और दूसरे एरोसोलाइज़्ड वायरस कण जो हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं।

इस समय हर जगह इसी की बहस छिड़ी हुई है और कोई भी निश्चित रूप से नहीं जानता कि कोविड -19 कितने समय तक एरोसोलाइज़्ड रह सकता है और यह जोखिम दूसरों की तुलना में कितना अधिक है।

हम अभी यही कर सकते हैं कि अभी हो रही रिसर्च के बारे में जागरूक रहें और इसकी पूरी पुष्टि होने तक सावधानी बरतें।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिज़ीज़ (NIAID) के वैज्ञानिकों ने NEJM (link) में एक स्टडी प्रकाशित की जो बताती है कि नियंत्रित लैब परिस्थितियों में क्या हो सकता है। उन्होंने एक नेबुलाइज़र का इस्तेमाल किया जो तरल पदार्थ से एक एरोसोल बना देता था और यह परीक्षण किया गया कि एरोसोलाइज़्ड हवा में वायरस कितने समय तक मापने योग्य रहता है। उन्होंने यह भी परीक्षण किया कि वायरस कब तक अन्य सतहों पर मापने योग्य था। उनके परिणामों से पता चला कि एरोसोलाइज़ेशन प्रयोग की 3 घंटे की पूरी अवधि में इतना वायरस था कि मापा जा सके। अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए ग्राफ़ देखें:

यह फोटो NIAID प्री-प्रिंट से ली गई है जिसमें वायरस की मात्रा (वायरल लोड) दिखाई गई है

डॉ जॉन कैंपबेल ने एक YouTube video बनाया है जिसमें इस रिसर्च पेपर पर और विस्तार से चर्चा की गई है।

मुँह और नाक-
रेस्पिरेटर हमारे चेहरे को तो ढँकता ही है, इससे हम किसी वायरस वाली चीज को छू लेने के बाद उसे अपने मुँह और नाक में नहीं ले जा पाते। यह ऊपर बताए दो फ़ायदों के अलावा एक प्रकार का एक्स्ट्रा फायदा है। हमें बस यह पक्का करना होता है कि रेस्पिरेटर को उतारते ही हाथों को सावधानीपूर्वक धो लें।

क्या आँखों की सुरक्षा जरूरी है?

कोरोनोवायरस त्वचा से शरीर के अंदर नहीं आ सकता पर यह सभी खुली म्यूकस मेम्ब्रेन से अंदर आ सकता है, जिसमें आंखें भी शामिल हैं।

यही कारण है कि आप अक्सर संक्रमित रोगियों के संपर्क में आने पर चिकित्साकर्मियों को आँखों के मास्‍क पहने हुए देखते हैं।

अंदर घुसने के रास्ते के रूप में मुँह की तुलना में आँखों से जोखिम कम होता हैं क्योंकि मुँह लगातार साँस के जरिए सीधे फेफड़ों में हवा पहुँचाता रहता है।

आंखों की सुरक्षा के दो तरीके हैं; एक डिस्पोज़ेबल रेस्पिरेटर के साथ सेफ्टी गॉगल, दूसरा फुल फेस रेस्पिरेटर। रबड़ एयर सील वाले सेफ़्टी गॉगल से हवा की एक एयर टाइट सील बन जाती है। उदाहरण के लिए, Bollé कंपनी ने कुछ सादे मॉडल बनाए हैं जिनमें एक रबड़ सील होती है पर इनके कई विकल्प भी उपलब्ध हैं।

संबंधित सवाल…

जोखिम कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

सोशल डिस्टेन्सिंग या सामाजिक दूरी

फ्लू और नोवल कोरोनावायरस जैसे वायरस ऐसे लोगों द्वारा फैलते हैं जो वायरस से संक्रमित है और दूसरे लोगों के संपर्क में आते हैं जो संक्रमित नहीं हैं।

आप संक्रमित लोगों के जितना ज़्यादा संपर्क में आएँगे, उतनी अधिक संभावना होगी कि आप संक्रमित हो सकते हैं।

Wikipedia के अनुसार, सामाजिक दूरी उन संक्रमण नियंत्रण क्रियाओं को कहते हैं जो किसी संक्रामक बीमारी के प्रसार को रोकने या धीमा करने के लिए सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लागू की जाती हैं।

हम इसे चीन, दक्षिण कोरिया और इटली जैसे देशों में होते देख रहे हैं।

सरकार द्वारा उठाए गए सामाजिक दूरी के उपायों के साथ ही हम खुद भी संभावित रूप से बीमार लोगों से दूर रहकर खुद को बचा सकते हैं, उदाहरण के लिए:

  • यदि आपके ऑफिस या काम में सुविधा हो तो वर्क फ्रॉम होम (घर से काम करने का विकल्प) लेना।
  • बड़े सार्वजनिक समारोहों जैसे किसी खेल या ऐसी स्थितियों से बचना जहाँ (जैसे शॉपिंग मॉल, जिम या सिनेमा) आप लोगों की भीड़ के संपर्क में आ सकते हैं।
  • व्यक्तिगत मिलने की जगह फोन / वीडियो कॉल पर बातचीत करना।

इस प्रकार के कदम सामान्य जीवन में बाधा पैदा कर सकते हैं पर इसके पीछे यह सोच है कि ये सब कुछ समय के लिए ही करना पड़ेगा – हमेशा के लिए नहीं!

महामारी के सबसे बड़े जोखिमों में से एक यह है कि यह शुरुआत में इतनी तेजी से फैलती है कि स्वास्थ्य सेवाएँ इसे संभाल नहीं पातीं। किसी भी देश का प्रमुख उद्देश्य इस स्थिति से बचना होना चाहिए और सामाजिक दूरी इसमें मदद कर सकती है।

भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना प्रसार कम करने के लिए जरूरी हो सकता है (जैसे भीड़ वाली ट्रेन)

नियमित हाथ धोना
– CDC नियमित रूप से कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने की सलाह देता है।

– खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथ जरूर धोएँ।

– नियमित रूप से हाथ धोने से हाथ सूख जाते हैं जिनमें कुछ गंभीर मामलों में इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। सूखेपन को कम करने के लिए नियमित रूप से पंप या ट्यूब वाले ग्लिसरीन आधारित मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें। हाथ डालकर बाहर निकालने वाली डिब्बियाँ सफाई की दृष्टि से उतनी अच्छी नहीं होतीं।

– एक स्टडी से पता चला है कि हम अपने चेहरे को औसतन हर घंटे 15 बार छूते हैं। इस आदत को बदलना मुश्किल हो सकता है लेकिन अगर हम अपने हाथों को साफ रखेंगे तो इससे नुक्सान पहुँचने का खतरा कम हो सकता है।

हाथ धोने के तरीकों के असर में अंतर दिखाती फोटो।

हाथ के नाखून काटें-
उंगलियों के नाखून छोटे होने से नाखूनों के नीचे गंदगी (और वायरस) फँसने का जोखिम कम रहता हैं। यह जाँचने करने के लिए कि आपके नाखून ज़्यादा लंबे तो नहीं हैं, अपनी उंगली से अपनी हथेली को छुएं। यदि आपको अपनी उंगलियाँ महसूस नहीं होतीं और बस नाखून ही छूते हैं तो साफ है कि आपके नाखून ज़्यादा लंबे हैं।

अल्कोहल आधारित हैंड सेनिटाइज़र
– CDC का सुझाव है कि यदि साबुन और पानी उपलब्ध नहीं हों तो कम से कम 70% अल्कोहल वाले अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करें। लगाने के बाद हवा में खुला छोड़ दें।

अपने फोन को सेनिटाइज़ करें
– यह देखते हुए कि हम कितनी बार अपने फोन का उपयोग करते हैं, अगली प्राथमिकता फोन को सेनिटाइज़ करना होनी चाहिए। अपने फोन और अन्य चीजों को साफ करने के लिए एंटी-बैक्टीरियल वाइप या अल्कोहल स्वाब (आमतौर पर 70% अल्कोहल) का उपयोग करना एक अच्छा विकल्प है। यदि एंटी-बैक्टीरियल वाइप फ्लू वायरस (H1N1) को मारने में सक्षम होने का दावा करते हैं तो यह एक अच्छा संकेत है कि वे कोरोनोवायरस के लिए भी ऐसा करने में सक्षम हो सकते हैं। पोंछने के बाद हवा में सूखने के लिए छोड़ दें।

जिन चीजों को आप बार-बार छूते हैं उनके बारे में जागरूक रहें। इनमें शामिल हैं:

  • कंप्यूटर कीबोर्ड और माउस
  • घर और कार की चाबी
  • बार-बार उपयोग की जाने वाली पानी की बोतल
  • कार स्टीयरिंग व्हील
  • कपड़ों की जेब
  • दरवाज़े का हैंडल

और इन्हें छूते समय उचित सावधानी बरतें – जहाँ तक संभव हो, सैनिटाइज़ करें।

अपनी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखें

रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं:

नींद
पर्याप्त, अच्छी क्वालिटी की नींद लें। ज्यादातर लोगों के लिए ‘पर्याप्त’ का मतलब होता है 7-8 घंटे। रात को देर से सोकर सुबह जल्दी उठने से बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। 2004 के एक लिट्रेचर रिव्यू ने निष्कर्ष निकाला कि “नींद की कमी का प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर काफी प्रभाव पड़ता है” और “इसे प्रतिरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए”(4)।

व्यायाम
नियमित रूप से व्यायाम करें लेकिन अति न करें। व्यायाम और प्रतिरक्षा प्रणाली पर 2007 में की गई एक स्टडी बताती है कि – “मध्यम मात्रा में व्यायाम सुरक्षात्मक प्रभाव बढ़ाता है जबकि बार-बार ज़ोर से व्यायाम करने से प्रतिरक्षा में शिथिलता आ सकती है”(5)

विटामिन डी

ऐसे साक्ष्य हैं जो दर्शाते हैं कि:

  • विटामिन डी प्रतिरक्षा के काम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • विटामिन डी की कमी से आप संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
  • विटामिन डी एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन से सुरक्षा देता है।
  • यह सच है कि इसमें से कोई भी खास तौर पर कोरोनावायरस से संबंधित नहीं है लेकिन यह सामान्यतः स्व प्रतिरक्षा तंत्र के लिए आवश्‍यक है।

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल मेटा-एनालिसिस (link) से, जिसमें 25 रैंडम कंट्रोल ट्रायल किया गया था (11,321 प्रतिभागी)

विटामिन डी और प्रतिरक्षा प्रणाली (link) पर एक ब्रिटिश मेडिकल जर्नल लेख से

हम विटामिन डी अपने खाने (कम मात्रा में) और धूप से प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपको ठीक से धूप नहीं मिले तो सिर्फ खाने के जरिए विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।

विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा क्या होती है? नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) सुझाव देता है कि वयस्कों को सभी स्रोतों से प्रतिदिन 600iu (15mcg) प्राप्त करना चाहिए। इसी तरह नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सिलेन्स (NICE) सुझाव देता है कि प्रतिदिन 400iu (10 माइक्रोग्राम) विटामिन डी युक्त सप्लीमेंट लिया जाए।

विटामिन डी और प्रतिरक्षा प्रणाली पर डॉ जॉन कैंपबेल का एक बहुत अच्छा वीडियो है। ये प्रतिदिन 400iu सप्लिमेंट के NICE दिशानिर्देशों का हवाला देकर बताते हैं कि ये रोज खुद 1,000iu युक्त विटामिन डी सप्लिमेंट लेते हैं।

यदि आप कोई सप्लिमेंट ढूँढ रहे हों तो ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं (link) है कि विटामिन डी 2 की तुलना में विटामिन डी 3 विटामिन डी स्तर 1.7 गुना अधिक बढ़ाता है।

विटामिन डी 3 की बिक्री करने वाले NSF certified निर्माताओं के उदाहरण हैं :
Life Extension – 1,000iu, Thorne Research – 1,000iu and Pure Encapsulations – 1,000iu.

सारांश-

यदि आप N95, KN95 और FFP2 / FFP3 मास्कों के बीच के अंतर नहीं समझ पा रहे थे तो उम्मीद है यह लेख पढ़ने के बाद आपको काफी चीजें समझ आ गई होंगी।

स्पेनिश बोलने वाले इस लेख को यहाँ पढ़ सकते हैं।

यदि आपके और प्रश्न हैं तो उन्हें नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखें।

आगे और सीखने योग्‍य-

डॉ जॉन कैम्पबेल के वीडियो की इस संक्षिप्त सूची में आप देख सकते हैं कि रोकथाम के लिए आप खुद क्या कदम उठा सकते हैं (जो सामूहिक रूप से भी फायदा करते हैं):

  • विटामिन डी और प्रतिरक्षा प्रणाली – YouTube video
  • बुखार- अच्छा होता है या बुरा? हिंट: ज़्यादातर अच्छा होता है YouTube video part 1 and part 2
  • हमारे आस-पास के वायरसों से कैसे बचें (सफाई के तरीकों सहित) YouTube video
  • Covid-19 सतहों और हवा में कब तक जिंदा रहता है और यह कितना खतरनाक हैYouTube video

डॉ जॉन कैंपबेल YouTube पर।

John

Posted by John

Note: Not a Medical Doctor or PhD. I'm a researcher and writer, with a focus on the subjects of health and longevity. My intent is to write about scientific research in an accessible, understandable way. If you believe something I've stated needs a reference, and I haven't done so, please let me know in the comments. Follow on: Twitter

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